Skip to main content

Lakhimpur Violence का अब तक का पूरा सच|जानिए कब,क्या और क्यों हुआ?by Vikram Shukla Bhai Ji | SRV News |





SRV News:-

Lakhimpur Violence का अब तक का पूरा सच, जानिए कब,क्या और क्यों हुआ?



वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें-




 लखीमपुर खीरी मामले में अभी तक आप लोगों ने तमाम वीडियो, तमाम दावे, तमाम पक्ष विपक्ष की बातें सुनी होगी।और बहोत कोशिश की होगी इस पूरे मामले को समझने की लेकिन हमारे देश में मौजूद चौथे स्तंभ के कुछ बड़े खिलाड़ियों के आपको पूरा मामला समझने नहीं दिया होगा। 


आपने इस मामले में जितना अंदर जाने की कोशिश की होगी आप उतना ही उलझ गये होंगे इन बड़े-बड़े चैनलों की फेर में। घटना एक है लेकिन अलग-अलग चैनल पर उसे अलग-अलग तरीके से प्रसारित करने का कार्य किया जा रहा है और सच को आपसे छिपाया जा रहा है। 


तो अगर सच सुनने की क्षमता और बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के मामले को समझने की कुववत है आपमेंतो वीडियो में लास्ट तक बने रहिएगा 

सच्चाई से रूबरू तो आपको SRV News करा देगा।



तो ये पूरा मामला शुरू होता 25 सितंबर को जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिसरा अपने संसदीय क्षेत्र लखीमपुर खीरी में किसी कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आ रहे थे तो उन्हें रास्ते में कुछ किसान यूनियन के लोगों ने काले झंडे दिखाए। जो कि केंद्रीय गृह राज़य मंत्री अजय मिश्रा को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा और उन्होंने मंच के इस बात का विरोध भी किया और मंच से ही ऐसा बयान दिया जो कि पूरे किसान यूनियन को नागवार गुजरा

इस बयान को सुनने के बाद किसान यूनियन के नेताओं ने ये तय किया कि इसका बहुत बड़े लेवल पर विरोध किया जाएगा। 


अब आता हूं मैं 3 अक्टूबर पर जिस दिन ये घटना घटित हुई।तो 3 अक्टूबर को यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का दौरा लगा हुआ था लखीमपुर खीरी में और उन्हें एक कार्यक्रम के सिलसिले में वहां जाना था


जिसके मद्देनजर किसान यूनियन ने ये डिसाइड किया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे केशव प्रसाद मौर्या का बहोत पुर-जोर तरीके से विरोध किया जाएगा और कार्यक्रम से जाते टाइम उन्हें काले झंडे भी दिखाए जाएँगे। 

एवं 3 अक्टूबर को जिस हेलीपैड पर केशव प्रसाद मौर्या उतरने वाले थे उस हेलीपैड को किसानों में पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया और उनके आने का वेट करने लगे। 

लेकिन केशव प्रसाद मौर्य हेलीकॉप्टर से ना आकर सड़क के रास्ते कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंच गये। जहां उनके साथ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी भी मौजूद थे।

रूट बदलकर कायक्रम में पहुँचने की वजह से किसानों की पूरी की पूरी प्लानिंग धरी की धरी रह गयी और वहां मौजूद कुछ नेताओं ने उन्हें चुनौती भी दी और ललकारा भी जो कि पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित था।



तो अभी तक मैंने आपको इस मामले का पूरा बेस समझाने की कोशिश की जिससे कि आप मामले को अच्छी तरह से समझ पाए। तो अब मैं आता हूं उस हिंसा पर जो उस हेलीपैड के पास घटित हुई जिसको किसानों ने अपने कब्जे में ले रखा था और हजारों की संख्या में वहां पर किसान मौजूद थे।


तो इस मामले की पहली सच्चाई तो ये है कि जो लोग भी कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए उस रास्ते से निकल रहे तो उनका वहां मौजूद किसानों ने कड़ा विरोध किया और उसकी गाडि़यों पर लाठियां अपनी बरसाईं। 


अब दूसरी सच्चाई ये है कि महिंद्रा थार समय जब तीन गाड़ियां वहां से निकलीं तो Mahindra Thar ने वहां खड़े किसानों को बुरी तरह से रौंद दिया जिससे कि 4 किसानों की मौत हो गई।उसके बाद वहां मौजूद किसानों ने अजय मिश्रा के ड्राइवर हरिओम मिश्रा समेत तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं की बहोत ही बेरहमी से हत्या कर दी।

इसके अलावा इस मामले में एक पत्रकार की भी हत्या हुई है जो कि मामले की कवरेज के लिए वहां पर गया हुआ था।



अब मैं आता हूं Mahindra Thar से जुड़े उस मामले पर जिसमें किसानों की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि Mahindra Thar कोई और नहीं बल्कि अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा चला रहे थे। लेकिन अजय मिश्रा और उनके बेटे Ashish मिश्रा ने इस मामले पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि वह Thar आशीष मिश्रा नहीं बल्कि उनका Driver हरिओम मिश्रा चला रहा था। 

बहरहाल ये तो जांच का विषय है कि गाड़ी कौन चला रहा था। इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी है और लगातार लोगों से पूछताछ भी जारी है। अगर यूपी Government चाहती है कि इस मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच हो तो अजय मिश्रा या तो खुद से इस्तीफा दे दें या फिर उनको बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए।



अब आता हूं मैं उस मुद्दे पर जिसमें कुछ लोग कहते हैं कि वहां मौजूद किसान असली किसान नहीं है बल्कि वो सभी नकली किसान हैं 

 तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वहां पर असली किसान भी हैं एक से एक गरीब किसान भी है। तो ये।कहना भी गलत है लेकिन वहां मौजूद सभी प्रदर्शनकारी केवल किसान ही हैं ये कहना भी गलत है क्योंकि वहां किसानों की आड़ में बहुत बड़ी संख्या असामाजिक तत्व एवं राजनीति से प्रेरित लोग भी हैं। जिस तरह से किसानों को कुचला गया वो भी गलत है लेकिन किसानों द्वारा जिन बेगुनाहों की बेरहमी से हत्या की गई वो भी गलत है। 


अब आता हूं इस मुददे पर कि किसानों का आंदोलन सही है या गलत। 

तो ये मामला कोर्ट में लंबित है और जो मायला कोर्ट में लंबित होता है उस मामले पर विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे कहीं ना कहीं ये संदेश जाता है कि आप को  कोर्ट भरोसा नहीं है। आप कोर्ट क्यूँ गये क्यूँकि आपको भरोसा है कोर्ट पर कि कोर्ट आपके साथ न्याय करेगा और उचित फैसला देगा।  इसीलिए गए थे ना आप तो आपको उसके फैसले का इंतजार करना चाहिए। 

लेकिन कोर्ट जाने के बाद सड़कों पर इस तरह के प्रदर्शन करना ये जाहिर करता है कि कहीं न कहीं आप को कोर्ट पर भरोसा नहीं है



बहरहाल भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां पर पीसफुल प्रोटेस्ट करना आपका संवैधानिक हक है।आप अपनी आवाज उठा सकते हैं, अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। बशर्ते आपकी वजह से किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। 

और हां कोई Protest कर रहा है तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप उसपे गाडी़ चढा देंगे 


 तो ये था पूरा मामला जोकि मैंने निडर, निष्पक्ष और निस्वार्थ भाव से आपके सामने रखा और आपको पूरे मामले से रूबरू कराया।

विक्रम शुक्ला नाम में देश का चौथा स्तंभ बहोत मजबूत है इसे इतनी आसानी से बिकने नहीं दुँगा।




Comments